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सपने में उपजी एक ‘‘रचना’’

  •भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी 


मैं
कथरी बिछी
टूटी खटिया पर
लेटा था।
हर मौसम की भाँति
इस प्रचण्ड गर्मी में
नींद नहीं आ रही थी।
बिजली गुल थी,
मच्छरों का प्रकोप
जारी था।
हाथ का पंखा चलाकर
शरीर का पसीना
सुखाने का
असफल प्रयास
कर रहा था।
कुछ देर के लिए
नींद आ गई
आती भी क्यों न-
दिन भर
दो जून की रोटी
कमाने के लिए
मेहनत-मशक्कत
जो किया था।
नींद में सपना देखता हूँ
कि-
मैं किसी
बड़े शहर की ऐतिहासिक
इमारत के भव्य
बागीचे में आधुनिक परिधान पहने
फिरंगी सा बना
खड़ा हूँ
और उसकी एक सेल्फी
अपने फेसबुक
वाल पर पोस्ट करता हूँ।
ऊपर कुछ पंक्तियाँ भी लिखता हूँ
उक्त रचना की पंक्तियों
का शब्दार्थ, भावार्थ मात्र
अंगुलियों पर गिने
लोग ही समझ सकते हैं।
मैंने यह भी देखा कि-
मेरी आशु कविता
जब मेरी लकदक
फोटो के साथ
फेसबुक वाल पर
पोस्ट हुई तो उसे पढ़कर
लोगों ने हजारों लाइक्स
और सैकड़ों कमेण्ट्स दिए हैं।
मैं अपने हाथ का
एन्ड्रॉयड फोन
जिसमें नेट पैक भरा होता है
बड़े गौर से देखता हूँ।
यह कार्य मैं नित्य-नियमित
कर रहा हूँ।

मुझे हिन्दी के कवि
पंडित सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’
की याद आने लगती है
साथ ही
उनकी वह रचना
‘सड़क पर तोड़ती पत्थर’...............
मैं स्वयं अपने आप पर
शर्मिन्दा होता हूँ
क्योंकि-
मेरी कथनी और करनी में
जमीन-आसमान का
अन्तर है।
मैं-
वर्तमान का
सुख-सुविधाभोगी
एक ऐसा व्यक्ति हूँ, जो
अपना प्रचार स्वयं अपनी
बेतुकी तथाकथित
रचना को
फेसबुक जैसे
सस्ते प्रचार माध्यम
पर पोस्ट करके
कर रहा हूँ।
मुझे
भारत रत्न अटल जी की
‘मेरी 51 कविताएँ’
याद आने लगती हैं।
यही नहीं
अतुकान्त कविता
के जनक और
उनके प्रचीन संवाहकों
की भी याद
आने लगती है।
पहले भी बेदना थी
लोग अभावग्रस्त
जीवन जी रहे थे,
गरीबी थी.................
किल्लतें थीं, जो
आज भी बदस्तूर
जारी हैं।
देश-समाज और लोग
विकास कर रहे हैं,
डिजिटल हो रहे हैं-
सुनकर क्षण भर के लिए
लोकतंत्रीय भीड़
के लोगों की तरह
मैं भी खुश हो जाता हूँ।
इसी बीच-
नींद टूट जाती है।
मैं-
उठ बैठता हूँ
हलक सूख रहा है,
प्यास कैसे बुझाऊँ
यह समस्या
मेरे सम्मुख विकराल रूप
धारण किए है......।
मेरे पास
महंगा मोबाइल नहीं है
वरना मैं भी
अपनी फटेहाल
सूखते गले, होठों पर जीभ
फेरता हुआ एक फोटो
सेल्फी के माध्यम से
फेसबुक वाल पर
पोस्ट करवा देता।
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(विद्वान, कद्रदान व समझदार मित्रों मेरी भी इस रचना अपनी पसन्द और टिप्पणियाँ देकर अनुग्रहीत करें)
 •भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी

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