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शहनाई

   ● शहंशाह आलम

वह किसी सूखी नदी के तल में जाकर
अपनी शहनाई को फूँककर बजाता है
अपने मुँह को नई ताक़त देता हुआ

बस मैं ही सुनता हूँ इस शहनाई की आवाज़
जिस का अर्थ था बचो पानी मेरी विवशता को
मेरी कायरता को दूर कहीं बहा ले जाने के लिए

शहनाई बजाने वाला जब इस वाद्य यंत्र को
बजाता है तल्लीन मेरे जीवन को नया गान देता
मैं गुनहगारों के रोज़नामचे से गुनाहों को मिटाता हूँ

उनके गुनाहों का फ़ैसला आदतन
सदियों पहले किया जा चुका होता है
इसलिए कि उनकी ख़्वाहिशें अनाज बचाने में
क़त्ल की जा चुकी होती हैं असँख्य बार

तब भी शहनाई बजाने वाला शहनाई बजाता है
पानी को अनाज को बचाए रखने के लिए
अपने गुनाहों में और इज़ाफ़ा करता हुआ।
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2 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया है
    MGSM के पास अपनी रचना भेजें

    पुष्पेन्द्र सिंह

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  2. बढ़िया है
    MGSM के पास अपनी रचना भेजें

    पुष्पेन्द्र सिंह

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