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प्राइवेट का दर्द


नहीं भरोसा सरकारों पर, न सरकारी काम पर
बिकती सरकारें व अफसर, ईमानों के दाम पर।
मान रहे हैं योगी जी की काम आपका अच्छा है
मुख्यमंत्री को जो पूछें नाम बोलता बच्चा है।
कहते हैं कि बहुत हो चुका निजी संस्था बन्द करो,
प्राइवेट स्कूल हास्पिटल अब इन सबका अन्त करो।
पूछू आपसे मंत्री जी  की हालत  बिगड़ी जाती जब
उनकी दवा न होती देश में फौरन फारेन जाते तब।
डी०एम० साहब का निर्देश सरकारी में करो प्रवेश
खुद के बच्चे कान्वेंट में बस जनता को है आदेश ।
डी०एम० साहब क्यों डरते हैं उस विद्यालय सरकारी से
ये भी बात सोचिए जरा पूछिए उन अधिकारी से।
खुद इलाज भी नहीं कराते अस्पताल सरकारी में
और आप हैं प्राइवेट प्रैक्टिस की बन्दी तैयारी में ।
गर प्राइवेट प्रैक्टिस के वो डाक्टर न रह जायेंगे
कितने मरीज तो अस्पताल जाते जाते मर जायेंगे।
प्राइवेट स्कूल अगर संस्कार नहीं दे पाता है
कहिये आप भला अभिभावक फिर क्यों वही पर जाता है।
आप सोचिये प्राइवेट से कितनों के घर चलते हैं
हम जैसे बेरोजगारों के पेट पीठ सब जलते हैं।
योग्य व्यक्ति का नहीं ठिकाना आपके इस परदेश में
कुछ भी करो लूट लेती हैं सरकारें इस देश में।
दर्दों का एहसास है अन्दर कैसे हसूँ मैं योगी जी
दिल में दर्द दबा रक्खा है क्या क्या लिखूं मैं योगी जी ।
आपसे बस मिलने की इच्छा दिल में मेरे योगी जी
अपनी करुण पुकार सुनाना चाहूं मेरे योगी जी ।

           
     
 - अजय एहसास,  सुलेमपुर परसावां, अम्बेडकर नगर (उ०प्र०), मो०- ९८८९८२८५८८

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