अजय कुमार ‘एहसास’ की रचनाएँ
बिछुड़न
पास आ करके हमें दूर न होना आया,दूर हो करके तुमसे बस हमें रोना आया ।
तुम्हारी याद में पलकें हैं बन्द होके खुली,
इन आँखों में नहीं नींद न सोना आया,
दूर हो करके तुमसे बस हमें रोना आया ।
न जाने कौन सी घड़ी थी शक किया तुमनें,
अपना कहने का हमसे छीन हक लिया तुमने,
मेरे हिस्से में तेरे दिल का न कोना आया,
दूर हो करके तुमसे बस हमें रोना आया ।
फूल तो फूल है बस फूल सभी चुनतें हैं,
मकड़ियों की तरह से जाल सभी बुनतें हैं,
किसी की राह में काँटें नहीं बोना आया,
दूर हो करके तुमसे बस हमें रोना आया।
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इसी गाँव चला आता है
लौट के फिर क्यों इसी गाँव चला आता है ,छोड़ के शहर इसी गाँव चला आता है ।
अब तो इस गांव से पतझड़ कभी नहीं जाता ,
लेकर आँधी वो इसी गाँव चला आता है ।
धर्म , मजहब है और जाति का फसाद यहाँ ,
वक़्त बेवक्त इसी गाँव चला आता है ।
कभी बुलाने पर सुनते नहीं थे जो हमको,
हाथ जोड़े वो इसी गाँव चला आता है ।
ठंड से भूख से थी मौत की खबर जो छपी,
जाने क्यों वो भी इसी गाँव चला आता है ।
देता भाषण है सभाएं है करता रैली वो,
वादे करने वो इसी गाँव चला आता है ।
जलते चिरागों को बुझाने का है हमे 'एहसास '
आग लगाने वो इसी गाँव चला आता है।
-अजय एहसास
सुलेमपुर परसावां
अम्बेडकर नगर (उ०प्र०)
मो०- 9889828588
सुलेमपुर परसावां
अम्बेडकर नगर (उ०प्र०)
मो०- 9889828588

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