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बाबू जी

बच्चों के संग बच्चा बनकर, सदा हँसाते बाबू जी ।
बच्चों की इच्छाओं को हैं, पूरे करते बाबू जी ।
जीवन जीतें हैं कैसे , जब हम दुनिया में आतें है।
हर मुश्किल में बनकर साया , संग हैं चलते बाबू जी।
मेरे नन्हे हाथों को, उंगली का सहारा देते थे ।
आज खड़े हम बिना सहारे, केवल उस स्पर्श के बल पर।
खुद पारस बनकर थे हमको , स्वर्ण बनाते बाबू जी ।
वो खुशियों के लिए हमारे , अपना सुख थे तज देते।
मेहनत करके सुबह शाम थे, हमें पढ़ाते बाबू जी ।
कभी जो चलते गिर जाते, हमको उत्साहित करते थे।
श्रम, विश्वास , संस्कारों का, बीज रोपते बाबू जी ।
वो एहसास सुखद था उसके जैसा था न कोई भी ।
प्रेम अश्रु आँखों में आता, जब गले लगाते बाबू जी ।

- अजय एहसास

सुलेमपुर परसावां

अम्बेडकर नगर(उ०प्र०)

मो०- 9889828588

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