एहसास
हमको हमारे दुख का ये एहसास न होता,
सासों की महक तेरी मेरे सांस में होता!
बनता नही शायर न यू मैं करता शायरी ,
बिछुड़ा जो मेरा तुम सा कोई खास न होता।
आँखों में आँसू बनके दर्द बहते ही गये,
पूछा जो किसी ने तो ये हम कहते ही गये।
मुझको न जलाती तो फिर ये प्यास न होता ,
हमको हमारे दुख का ये एहसास न होता।
सासों की महक तेरी मेरे सांस में होता।
वो चल दिये थे ऐसे जैसे झोंका हवा का,
दर्दों को मेरे न था जरुरत भी दवा का।
हो मित्र आप जैसे कहाँ शत्रु की कमी,
हसते ही रहे देख मेरे आँख की नमी।
तू भूलकर भी जो हमारे पास न होता,
हमको हमारे दुख का ये एहसास न होता।
सासों की महक तेरी मेरे सांस में होता। बरसात के दिनों में वो जो नाव बनी थी,
पानी के थपेड़ों से वो भी डूब गयी थी ।
धरती को मोहब्बत का ये एहसास न होता,
बाहों में थामें उसको जो आकाश न होता।
हमको हमारे दुख का ये एहसास न होता। सासों की महक तेरी मेरे सांस में होता।
सासों की महक तेरी मेरे सांस में होता!
बनता नही शायर न यू मैं करता शायरी ,
बिछुड़ा जो मेरा तुम सा कोई खास न होता।
आँखों में आँसू बनके दर्द बहते ही गये,
पूछा जो किसी ने तो ये हम कहते ही गये।
मुझको न जलाती तो फिर ये प्यास न होता ,
हमको हमारे दुख का ये एहसास न होता।
सासों की महक तेरी मेरे सांस में होता।
वो चल दिये थे ऐसे जैसे झोंका हवा का,
दर्दों को मेरे न था जरुरत भी दवा का।
हो मित्र आप जैसे कहाँ शत्रु की कमी,
हसते ही रहे देख मेरे आँख की नमी।
तू भूलकर भी जो हमारे पास न होता,
हमको हमारे दुख का ये एहसास न होता।
सासों की महक तेरी मेरे सांस में होता। बरसात के दिनों में वो जो नाव बनी थी,
पानी के थपेड़ों से वो भी डूब गयी थी ।
धरती को मोहब्बत का ये एहसास न होता,
बाहों में थामें उसको जो आकाश न होता।
हमको हमारे दुख का ये एहसास न होता। सासों की महक तेरी मेरे सांस में होता।


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