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माँ

 सरस्वती

अब समझ पाती हू
माँ की बिवाइयों से
रिसते खून का मतलब
माँ के खुरदुरे हाथों में
जमी मैल का मतलब
माँ के घिसे नाखूनो का मतलब
माँ के बालों में
पड़ी गांठ का मतलब
माँ के तन में
आई बीमारी का मतलब
माँ की आँखों में
छाये अँधेरे का मतलब
कितनी ख़ामोशी, कितने धैर्य से
वो निभाती रही
अपनी हर जिम्मेदारी
माँ की, पत्नी की, बहू की, बेटी की
बिना देखे
बिवाइयों से रिसते  खून
हथेलियों का खुरदुरापन
पिसती रही
जिम्मेदारियों की चक्की में
एक दिन मैंने पूछा
'माँ तुम्हारी पसंद '
माँ हसकर बोली
'सबकी ख़ुशी और संतुष्टि'
तो क्या सच में
उनकी अपनी कोई अभिलाषा न थी ?
सुख सबको बांटा
दुःख में अकेली  दुपक कर रोई
सबकी सेवा की
मन से तन से
बदले में मिली
उपेक्षा
अवहेलना
किसी ने नहीं देखी
उनकी बिवाई
उनके बालों की गांठ
उनके घिसे नाखून
उनके शरीर को खाती बीमारी
मैंने भी नहीं।

                       -सरस्वती, दिल्ली (कवि, पत्रकार)

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